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मदरसों में दीनी तालीम के साथ हुनर की तालीम भी देना चाहिए – डॉ. इंद्रेश कुमार

गुवाहाटी/नरसिंहपुर केसरी- मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के संरक्षक और मार्गदर्शक तथा आरएसएस के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य डॉ. इंद्रेश कुमार ने कहा कि मदरसों में धार्मिक शिक्षा के साथ-साथ हुनर को विकसित करने की तालीम देनेकी व्यवस्था करनी होगी तभी बच्चों का भविष्य सुधरेगा और देश का भी विकास होगा। इस आशय के विचार उन्होंने मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के असम प्रदेश इकाई द्वारा गुवाहाटी के श्रीमंत शंकरदेव कला क्षेत्र में दिनांक 30 नवंबर को आयोजित कार्यकर्ता सम्मेलन में व्यक्त किये।
इस समय मंच पर असम प्रदेश अल्पसंख्य बोर्ड के चेयरमैन  हबीब मोहम्मद चौधरी, मंच के राष्ट्रीय संयोजक द्वय गिरीश जुयाल और विराग पाचपोर, महिला प्रकोष्ठ की राष्ट्रीय संयोजिका सुश्री शालिनी अली (देहली), और सह-संयोजिका सुश्री सुषमा पाचपोर (नागपुर), पूर्वोत्तर क्षेत्र संयोजक रफीक मोहम्मद, असम प्रदेश संयोजक अल्कास हुसेन आदि विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित थे। अपने लगभग एक घंटे के प्रेरक उद्बोधन में डॉ. इंद्रेश कुमार ने कहा कि भारत के मुसलमान पुरखों से, वतन से और तहजीब से हिंदुस्तानी थे, हैं और रहेंगे। दुनिया की कोई ताकत इस सत्य को नकार नही सकती। कुरआन के दाखले से उन्होंने कहा कि हब्बल वतनी, वतन की हिफाजत और वतन के लिए कुर्बानी आधा ईमान हैंऔर जन्नत का रास्ता हैं। मुस्लिम राष्ट्रीय मंच प्रारम्भ से ही बच्चों की शिक्षा, संस्कार और विकास पर ध्यान दे रहा हैं। आधी रोटी खाएंगे बच्चों को पढ़ाएंगे यह मंच का नारा हैं।
माँ के कदमो में जन्नत हैं ऐसा कहते हुए डॉ. कुमार ने कहा कि 8.5 करोड़ मुस्लिम बहनों का हक दिलाने के लिए मंच ने तीन तलाक के खिलाफ मुहिम चलाई और उसमें सफलता भी हासिल की। आज़ादी के 75 वर्ष के उपलक्ष्य में मंच के द्वारा असमिया भाषा मे भारत के संविधान का विमोचन और लोकार्पण इस अवसर पर डॉ. इंद्रेश कुमार ने किया।
इस कार्यक्रम में डॉ. आलम, असम प्रदेश महिला प्रकोष्ठ संयोजिका रिजवी सुल्ताना अहमद, मौलाना प्रकोष्ठ संयोजक मौलाना मोटर रहमान, त्रिपुरा के प्रदेश संयोजक मोहम्मद जाहिर, प्रदेज़ह सह-संयोनिक अजमोद बेगम, सुल्ताना प्यारा अंजुम, डॉ. जेरीफ और नेकिमा सुल्ताना आदि उपस्थित थे।

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