भोपाल

कोविड-19 वायरस के तीसरी वेव यानी लहर को होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति एवं चिकित्सकों की मदद से रोका जा सकता है – डॉ रमेश प्रेमी

भोपाल/नरसिंहपुर केसरी- कोविड-19 वायरस के तीसरी बेव यानी लहर को होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति एवं चिकित्सकों की मदद से रोका जा सकता है यदि हम सही समय में इनका उपयोग करते हैं तो”
3rd wave covid 19 virus -बच्चों में और इसके आने की संभावना बताई जा रही है सितंबर के आसपास यह वायरस तरह-तरह के वैरीअंट चेंज कर रहा है जिससे और चैलेंज में हो जा रहा है वैक्सीन का काम अपनी जगह है बीमारी अपनी जगह कार्य कर रही है इसका वायरस अपनी तरह से कार्य कर रहा है बच्चों में सबसे अहम चीज यह बताई जा रही है कि जैसे अभी कोविड-19 वायरस पोस्ट कोविड-19 वायरस के जो साइड इफेक्ट देखने को मिले बड़ों में बच्चों में भी देखने को मिलेंगे बच्चों में मिलेंगे मल्टी सिस्टम इन्फ्लेमेटरी सिंड्रोम जो बहुत ही चिंताजनक बताया जा रहा है इसमें स्किन से लगाकर ब्रेन, लीवर हड्डियां किडनी, लॉन्ग , हार्ट , ब्लड वेसल्स, मुंह में छाले, और भी अधिक, जो कि बहुत ही चैलेंजिंग है हम जानते हैं क्योंकि हमने फर्स्ट और सेकंड कोरोना की लहरों से किस कारण से कितनी मौतें हुई है सभी जान चुके, हमें सबक लेते हुए बच्चों की जान सुरक्षित रहे उसके लिए अभिभावक और सरकार दोनों ही सावधान रहें। बच्चों के लिए किसी भी दवाई किसी भी चिकित्सा पद्धति की हो जो शिशु रोग विशेषज्ञ जो कि सभी चिकित्सा पद्धति में उपलब्ध है एमडी पीडियाट्रिक्स से एलोपैथी होम्योपैथी आयुर्वेदा यूनानी सभी में एमडी पीडियाट्रिक्स होता है और ग्रेजुएट चिकित्सक तो है ही, सु प्रशिक्षित बच्चों के स्वास्थ्य के लिए तैयार है उसकी रोकथाम करने के लिए प्रशिक्षित है। बच्चे मैं सुरक्षित तरीके से इनका उपयोग किया जा सके क्योंकि अब ऑक्सीजन इंजेक्शन बेड एनआई सी यू, पीआईसीयू, कहां चिकित्सा की जरूरत पड़े तो कमी ना हो सके प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से लगाकर के जिला चिकित्सालय सभी तैयार हैं होम्योपैथी चिकित्सालय मैं भी तैयारियां करें , अभी तक बच्चों के वैक्सीनेशन ना आए हैं अभी लग सके इसलिए होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति से इनका प्रिवेंशन से लेकर के उपचार एवं पोस्ट कोविड-19 वायरस का उपचार संभव है वैक्सीन भी आ जाए तो भी उसका उपयोग किया जाए।
कुछ प्रमुख दवाइयां है जो देने से बहुत फायदा हो सकता है। जैसा कि भारत शासन आयुष विभाग द्वारा दवाइयों का विशेषज्ञों द्वारा बताई गई है
मैं भी अपनी प्रैक्टिस में देता हूं और उनका लाभ लेता हूं मरीजों को भी भरपूर लाभ मिलता है बच्चों के लिए
आर्सेनिक एल्बम 30 रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने से लेकर के उपचार तक दी जा सकती है उसके बाद होने वाले कॉम्प्लिकेशंस MIS-C भी उपयोगी है,
कैल्केरिया कार्ब 30,
IPC 30, Bryonia 200,
Chamomila 30 , Belladonna 30,baryta carb 30, podophyllum 30 ,phos30.
Sulph 30.
Etc
ऑक्सीजन spo2 कम हो रहा हो यह दवाई होम्योपैथी की बहुत उपयोगी होगी हो रही है बच्चों में
कार्बो वेज 200, Antim tart 30, aspidosperm Q-30, venadium met 30,oxigenium 30,etc

इनका उपयोग योग्य क्वालिफाइड होम्योपैथिक चिकित्सक की सलाह से ही लें।
बच्चों में अगर तीसरे लहर आती है तो इस चिंता का बहुत ज्यादा चिंता का विषय है क्योंकि हमारे निपटने के लिए क्या हमारी तैयारी है क्या नहीं है जैसे कि हम सबकी एक्सपीरियंस रहे हैं कहीं दवाओं की कमी डॉक्टरों की कमी अस्पतालों की कमी ऑक्सीजन की कमी इंजेक्शन की कालाबाजारी ऑक्सीजन की कालाबाजारी अनेकों लोगों की मौतें हुई है क्या एक तरह की चिकित्सा पद्धति पर निर्भरता यह दर्शाती नहीं तो हमें होम्योपैथी के बारे में सोचना होगा यह बच्चों के लिए आसानी से देने वाली दवाई है जिसमें किसी तरह के साइड इफेक्ट नहीं है चूसने वाली दवाइयां है मीठी दवाइयां होती हैं बच्चे आसानी से खा लेते और कम दवाई देना होते हैं एक महत्वपूर्ण योगदान दे सकती है अगर हम इसका उपयोग करें आज होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति में ग्रेजुएट डॉक्टर हैं पोस्ट ग्रेजुएट एमडी पीडियाट्रिशियन है इनका उपयोग किया जाए। यही समय की मांग है पहले से हम इनका उपयोग करेंगे तो हम किसी भी भयानक आपदा को कंट्रोल करने में सक्षम हो सकेंगे।
कोरोना अभी तक गया नहीं, सिर्फ थोड़ी सी कोशिश में बार-बार सुनो देखो समझो थोड़ी सी कोशिश नहीं थोड़ी सी समझदारी ने कोरोना को कम करने में उसके संक्रमण को फैलने से कम करने में मदद की है जब हमने समझदारी दिखाएं एक साथ एकजुटता साथ सरकार के दिशा निर्देशों का पालन किया कोरोना गाइडलाइंस का पालन किया आयुष विभाग भारत शासन और होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति को अपनाते हुए, हर बार हमने कोरोना पीछे किया और हम कोरोना से जीते, पहली ही वेब से हमने अपने बुजुर्गों को सुरक्षित किया, आर्सेनिक एल्बम लेते रहे जैसा कि आयुष विभाग भारत शासन एवं होम्योपैथी सेंट्रल रिसर्च काउंसिल आफ होम्योपैथी भारत शासन ने निर्देशित किया तो हम सब सुरक्षित रहे जैसी हम ने लापरवाही की जैसी ही हमने उस दवाई का उपयोग करना सही नहीं समझा नासमझ कहिए यह जो भी लापरवाही हुई हो थोड़ी सी लापरवाही वैक्सीन आने के कारण भी हुई जब तो वैक्सीन आ गई अब डरने की जरूरत नहीं है मैं वैक्सीन का विरोधी नहीं हूं क्योंकि होम्योपैथिक खुद मानती है थोड़ी सी दवाई जिससे संपूर्ण मानव जाति का विनाश रुकता हो उद्धार होता हो ऐसी दवाई का उपयोग करना अति आवश्यक है जिसके भविष्य में कोई भी तुरंत और बाद में और उनके वंशानुगत किसी भी तरह की हानि ना हो, एकल और मिनिमम दवाई का उपयोग ही होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति है, उसको डायनेमिक तरीके से बनाया जाता है और जब तक यह दवाई स्वास्थ्य मानव शरीर में प्रमाणित नहीं होती और उसके बाद बीमार मनुष्य जिसमें वैसे ही लक्षण और साइन, चाहे वह किसी रोग से मिले चाहे रोग से ना मिले, चाहे किसी की पर्सनालिटी से मिले या ना मिले तीव्रता अति तीव्रता बहुत ही घातक संक्रमित, नॉन संक्रमित, प्राण लेने वाले, एक आदमी में फैलने वाले, सामूहिक रूप में फैलने वाले, एक आदमी से पूरे परिवार में फैलने वाले, एक क्षेत्र से अनेक क्षेत्रों में एक शहर से दूसरे शहर राज्यों से अनेक राज्यों में देश से अनेकों देशों में एक साथ एक ही कारण एक ही साइन और लक्षणों के साथ प्राणघातक बीमारी महामारी हर बार आएगी कहते हैं हंड्रेड वर्ष बाद आती है उसमें कुछ ना कुछ नया वैरीअंट जरूर होगा , डॉक्टर सैमुअल हैनीमैन द्वारा यही चीज समझाई गई है उसको से निपटने के लिए जीनस एपिडेमिकस रिमेडी प्रोसेस दी हुई है उसको समझना और सही समय पर उसका उपयोग करना समझदारी है यही साइंस है यही मेडिकल साइंस है यही एडवांस साइंस है यही एडवांस होम्योपैथी मेडिकल साइंस है इससे ही जिंदगी बचाई जाती है, तब अनेकों बार डॉक्टर सैमुअल हैनीमैन अपने जीवन काल में कई महा मारियो का सामना किया और उनसे निपटने के लिए जीनस एपिडेमिकस रिमेडी का उपयोग किया, जैसे अट्ठारह सौ दशक में स्कारलेट फीवर इसके उदाहरण है उसके बाद कॉलरा एपिडेमिक उस को कंट्रोल करने में होम्योपैथी का महत्वपूर्ण योगदान रहा मृत्यु दर कम करने में महत्वपूर्ण योगदान रहा अगर हम अभी अभी की बात करें क्योंकि उस समय मलेरिया भी एक विश्व की चुनौती थी उससे सब सर्वाधिक मौतें होती थी आज भी मौतें होती हैं लेकिन उसकी रिमेडी हमने निकाल ली उसके कारण को जान लिया उसके प्रिवेंशन को जान लिया जिससे मलेरिया फैलता है उसको जान लिया इस कारण से हम इस बीमारी पर कंट्रोल कर लिए लेकिन मौतें अभी भी मलेरिया से होती हैं इस चीज को हमें समझना होगा किस दवाई से बीमारियों का निदान होता है रोकथाम होती है बचाव होता है बीमारियां को शरीर में दबा दिया जाता है दवाइयों के द्वारा जो ठीक नहीं होती है दवाइयों के असर के कारण उनके लक्षणों साइना में दिखाई नहीं देते समझ नहीं आते हैं लेकिन बीमारी शरीर के अंदर बढ़ती रहती है जब दवाइयों का उपयोग करना बंद कर दिया जाता है या उनका असर कम हो जाता है तो वह बीमारी या तो मूल लक्षणों के साथ आती हैं या फिर अपने लक्षणों को बदलते हुए और भयानक रूप में शरीर में प्रकट होती हैं दूसरे या जहां जिस जगह थी वहां या फिर दूसरे अंगों में भी होना शुरू होते हैं उनको कॉम्प्लिकेशंस नाम दे दिया जाता है फिर मूल बीमारी का उपचार ना होते हुए कॉम्प्लिकेशंस का उपचार होने लगता है होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति ऐसा नहीं होता है इसमें ,इसमें मूल कारण के साथ उस बीमारी का इलाज किया जाता है मतलब होम्योपैथी का सिद्धांत बोलता है होम्योपैथी रोग कि नहीं बल्कि रोगी की चिकित्सा करते हैं इसका मतलब है हॉलिस्टिक अप्रोच से चिकित्सा की जाती है, जिसमें चाहे एक मनुष्य हो थोड़े से भी समूह में बीमारी हो या अधिक समूह में एक साथ बीमारी आई उसमें इसी तरीके से होम्योपैथी में दवाइयां है इसी तरीके से उनका उपचार किया जाता है। 1796 से आज तक 250 सालों से अधिक हो गया होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति को आए हुए विश्व में ऐसा कोई भी देश नहीं है जिसमें होम्योपैथिक चिकित्सा पद्धति के डॉक्टर ना हो वहां की जनता इसका उपयोग ना करती हो, इसलिए डब्ल्यूएचओ ने बोला है विश्व की दूसरे नंबर की चिकित्सा पद्धति होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति है इसलिए अंतर्राष्ट्रीय चिकित्सा पद्धति एलोपैथी के बाद होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति मात्र है।
डब्ल्यूएचओ क्या है विश्व स्वास्थ्य संगठन इसका अर्थ क्या किसने बनाया इसके बनाने के पीछे का उद्देश्य क्या है इसमें कौन लोग रहेंगे। जबकि स्वास्थ्य की परिभाषा स्वास्थ्य, विश्व स्वास्थ संगठन स्वास्थ्य की परिभाषा दी है डब्ल्यूएचओ के अनुसार “स्वास्थ्य रोग का ना होना, या अक्षमता मात्रा नहीं बल्कि पूर्ण शारीरिक मानसिक और सामाजिक तंदुरुस्ती की स्थिति है पिछले कई वर्षों से इस परिभाषा का विस्तार हुआ जिसमें सामाजिक व आर्थिक रूप से गुणकारी जीवन वितरित करने की क्षमता को सम्मिलित किया गया है “आप सभी जानते हैं क्या बिना होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति के विश्व स्वास्थ संगठन की परिभाषा को सही प्रमाणित करना जायज हो सकता है, नहीं तो विश्व स्वास्थ संगठन में होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति का विभाग होना अति आवश्यक है वहां पर चिकित्सक होना अति आवश्यक है होम्योपैथी के जितने भी होम्योपैथी के विभाग होते हैं उन सभी के चिकित्सक होना अति आवश्यक है जितने भी एलोपैथी में भाग होते हैं रोग विभाग उनमें होम्योपैथिक चिकित्सकों का होना अति आवश्यक है उनके साथ मिलकर के आज की रिसर्च के अनुसार एविडेंस लाने के लिए उनकी ओपीडी आईपीडी होना अति आवश्यक है तभी हम और विश्व स्वास्थ संगठन जैसे एलोपैथी पर गर्व करता है उसी तरीके से यह संगठन होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति पर भी गर्व करेगा बल्कि यह गर्व करेगा होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति का समय के साथ विस्तृत रूप है एलोपैथी का, जैसे कई बड़े-बड़े चिकित्सकों ने बोला है जहां एलोपैथी फेल हो जाती है वहां से होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति सफल होती है।
सर्जरी के केस इसमें ऐसी अनेकों कॉम्प्लिकेशंस है जहां पर मनुष्य की सर्जरी करना तो अति आवश्यक है लेकिन किसी के प्राण जाने की संभावना अधिक है किसी उम्र की वजह से नहीं हो पा रही है किसी की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है किसी का शरीर ऐसा नहीं है कि उसकी सर्जरी की जाए या अति महत्वपूर्ण नहीं है होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति में अननेसेसरी सर्जरी को रोका जाता है चैलेंजिंग सर्जरी के अनेकों रोगों को उनकी रोकथाम एवं उपचार होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति से होता आ रहा है सफलता के साथ जैसे साइनोसाइटिस, टॉन्सिलाइटिस, कई तरह की एलर्जी, कई तरह के मस्से गांठ है नॉन कैंसर इस कैंसर गांठें, सॉफ्ट टिशु से लेकर हार्ड टिशु तक बाहरी अंगों से लेकर अंदरूनी अंगों तक सफलतापूर्वक उपचारित करती आई है किडनी की पथरिया, गाल ब्लैडर की पथरी, यूट्रस में होने वाली गांठें, हड्डियों में बदलाव ओस्टियोआर्थराइटिस अर्थराइटिस गाउड्स, लिवर कैंसर, अनेकों ऐसे वह एवं लक्षण एवं साइन जिनका हम जांचें कराते कराते सही डायग्नोसिस पर नहीं पहुंच पाते हैं उसकी चिकित्सा संभव नहीं हो पाती है ऐसे रोगों में भी होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति का कोई जवाब नहीं लक्षण एवं साइन के आधार पर शुरू से ही हम उसकी चिकित्सा प्रारंभ कर देते हैं समय गांव आए हुए उसका उपचार हो जाता है भविष्य में होने वाले रोगों को भी रोका जा सकता है पीढ़ी दर पीढ़ी रोगों में भी बदलाव किया जा सकता रोका जा सकता है ऐसी होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति में व्यवस्थाएं हैं,
विश्व की और भारत के चिकित्सक और वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है की तीसरी वेब कोरोनावायरस की आएगी और यह होगी घातक बच्चों के लिए मैं बताना चाहता हूं अगर सरकार होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति को बढ़ावा देती है उनकी चिकित्सकों से सलाह मशवरा लेती है तो तीसरी बीएफ कोरोना की रोकने में बहुत मदद मिल सकती है ,
बच्चों में होने वाले रोगों के लिए सर्वाधिक दवाइयां होम्योपैथी में शुरू से ही प्रमाणिकता के साथ सिद्ध होती आई है उनके चैलेंजिंग केस इसके लिए बस उसका उपयोग आना चाहिए सही समय पर युग होम्योपैथिक चिकित्सकों की सलाह से तीसरी बेव कोरोना की रोकने में सबसे अधिक महत्वपूर्ण कदम होगा यदि होम्योपैथिक चिकित्सकों को सरकार एवं डब्ल्यूएचओ अपना साथ में लेकर के कोरोना बचाव के लिए कार्य करता है तो,
जब तक सुरक्षित रहें सरकार की राज्य शासन की गाइडलाइंस का पालन करते रहे अभी भी भीड़ भाड़ नहीं करना है मास्क लगाना है हाथों को साबुन से धोते रहना है, मौसम की फलों को सब्जियों को भोजन को करना है ताजा पानी पीना है।
अभी अब मलेरिया का प्रकोप बढ़ सकता है मच्छरों को पनपने नहीं देना है मच्छरदानी का उपयोग करना है और प्रिवेंशन की होम्योपैथी दवाई मलेरिया की आती है उसको लेना है मलेरिया आफ 200 होम्योपैथिक चिकित्सक की सलाह से लेना अब अति आवश्यक है।
आओ हम मिलकर के संकल्प लें कोरोना संक्रमण को रोकने में उसको भगाने में हर अति आवश्यक कार्य करेंगे होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति का उपयोग करेंगे होम्योपैथी मेडिसिन का उपयोग अच्छे क्वालिफाइड होम्योपैथी चिकित्सा की निगरानी में करेंगे।

डॉ रमेश कुमार प्रेमी
बीएचएमएस, सर्टिफिकेट कोर्स एडवांस होम्योपैथी, एमडी होम्योपैथी मेडिसन
होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति से उपचार 12 वर्षों से लगातार कोरोनावायरस के रोगियों के लिए निरंतर ऑनलाइन और ऑफलाइन डेढ़ साल से निरंतर अपनी सेवा देते हुए
पूर्व जुड़ा प्रेसिडेंट शासकीय होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल भोपाल मध्य प्रदेश
फाउंडर एवं वरिष्ठ संरक्षक-ऑल इंडिया होम्योपैथिक मेडिकल एसोसिएशन। 

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