जबलपुर समाचार

जो दूर कर दे लोगों की पीर वो ही तो हैं अपने कर्मवीर

जबलपुर/नरसिंहपुर केसरी- 

मैं कभी हारता नही
या तो मैं जीतता हूँ
या फिर सीखता हूँ।।

इन शब्दों को अपने जीवन का ब्रह्म वाक्य मानने वाले जबलपुर के कलेक्टर कर्मवीर शर्मा को उस वक्त जबलपुर की बागडोर सौंपी गई थी जब कोरोना से सारा शहर जूझ रहा था जाहिर है किसी भी शहर को समझने उसे जानने और उस हिसाब से अपनी कार्य पद्धति बनाने में वक्त लगता है कई चुनौतियां भी उनके सामने थी लेकिन कहा जाता हैं न जहाँ चाह होती है तो रास्ते अपने आप खुलते जाते हैं यही कारण था कि अपनी बेबाक छवि, शानदार कार्य करने का अंदाज, कर्म परख, कर्म प्रधान, कर्मवीर शर्मा ने जबलपुर में कोराना की पहली और दूसरी लहर में कर्तव्य का निर्वहन करते हुए कोरोना रूप महामारी से मुक्त करने का बीड़ा उठाया रात दिन की मेहनत जनप्रतिनिधियों और मीडिया से लगातार संपर्क में रहते हुए न केवल उनसे सुझाव लिए बल्कि उनके बेहतर सुझावों को अमली जामा पहनाने में भी देर नहीं लगाई जिसका सुखद परिणाम है कि आज जबलपुर के नागरिक चैन की सांस ले रहे हैं श्री शर्मा ने शहर को अपना माना अपनी सूझबूझ रात दिन की मेहनत और अथक प्रयास का परिणाम है कि आज जबलपुर में पॉजिटिविटी रेट घटकर न्यूनतम पर आ गया है जरा सोचिए हम चार 4 लोगों के परिवार को संभालने मैं घबरा जाते हैं कोई निर्णय लेना पड़े तो हम हिचकिचाते हैं और अगर हमें लाखों लोगों के बारे में निर्णय लेना हो तो हमारा क्या हाल होगा निश्चित रूप से जिले के 23,67,469 लोगों की जान बचाने का श्रेय श्री शर्मा को जाता है कर्मवीर शर्मा का अपने काम और कर्तव्यों के प्रति कितना जुनून था इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कोरोना पॉजिटिव होने के बाद भी उन्होंने आराम नहीं किया और पूरे वक्त जिले की चिंता में लगे रहे।
आइए मिलकर उनका हौसला बढ़ाएं और उन्हें यह विश्वास दिलाएं कि शहर का हर नागरिक उनके साथ है और निश्चित ही हम उनके साथ मिलकर कोरोना से जंग जीत जगाएंगे

जबलपुर एक बार फिर मुस्कुराया

लेख- उमाशंकर अवस्थी 

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