नरसिंहपुर

सत्ता के “चिराग” से जिले के विकासपथ को रोशन कर रहे एनपी प्रजापति विजय आजाद, नरसिंहपुर।

अपनी हसरतों को पलभर में पूरा करने के लिए ‘अलादीन का चिराग” अमूमन हर कोई चाहता है। विरले ही ऐसे उदाहरण हैं जब किसी ने चिराग की शक्ति  का इस्तेमाल खुद के लिए नहीं बल्कि समाज कल्याण, दीन-दुखियारों के कल्याण के लिए किया हो। बात नरसिंहपुर जिले के परिदृश्य की करें, तो यहां सत्ता रूपी चिराग के साथ मनोरथ पूरा करने का अवसर बहुतों को मिला, लेकिन जिले को विकास की जैसी जरूरत थी, अपेक्षाएं थी, वह पूरी नहीं हो सकीं। हालांकि इस मामले में एनपी प्रजापति अपवाद हैं। अब इसे ईश्वरीय इच्छा कहें या फिर संयोग,  इस चिराग को संभालने की जिम्मेदारी एक बार फिर नर्मदा प्रसाद प्रजापति को मिली है। सत्ता के इस चिराग से श्री प्रजापति जिले के विकासपथ को रोशन करने में जुटे हैं। वे जनता का सर्वांगीण विकास, बिना किसी भेदभाव के सबका उत्थान और कल्याण चाहते हैं। उनकी सहजता और सरलता भी इतनी कि हर उम्र का व्यक्ति उनसे बात कर ले, बिना लाग लपेट हर किसी की बात सुनकर त्वरित निराकरण के साथ जबाव देने वाले विरले ही होते हैं। स्वतंत्रता के बाद से मध्यप्रदेश और नरसिंहपुर की धरती ने कई नेता देखे, उन्हें आजमाया और भरपूर आशीर्वाद के साथ मौका भी दिया, पर जनता की उम्मीदों पर वे अपेक्षाओं के अनुरूप खरा नहीं उतर सके। ऐसे में प्रदेश की राजनीति में एनपी प्रजापति का पदार्पण जिले के वाशिंदों के लिए विकास की नई परिभाषा गढ़ने वाला साबित हुआ। युवा अवस्था में ही उन्होंने सोच लिया कि इस जिले के लोगों का फर्ज अदा तो करना होगा, उनकी जरूरतों का ध्यान रखना होगा। वह जिले के लोगों की चिंता में खोए यह सोचते कि यहां ऐसा होगा तो अच्छा लगेगा, यहां यह होना चाहिए, यह अब तक क्यों नहीं हुआ। वह विकास पूरी संकल्पना को मन में ही संजोते रहे।
गांव-गांव पहुंचाई बिजली
द्वीपीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती के कृपा पात्र शिष्य नर्मदा प्रसाद प्रजापति को जब-जब जनता की सेवा का मौका मिला और सरकार ने उन्हें योग्य समझते हुए जिस पद से नवाजा उसे उन्होंने सम्मान देते हुए अपनी पूरी ताकत जनता के कामों में लगा दी। वर्ष 1993 से पहले इस नरसिंहपुर जिले के गांवों की रातें अंधेरे में डूबी रहती थीं। फिर इस अंधकार के दौर में उजाला बनकर आए कांग्रेस की दिग्विजय सरकार में प्रदेश ऊर्जा मंत्री नर्मदा प्रसाद प्रजापति। ऐसा नहीं कि उस समय जिले में बड़े नेताओं का अभाव था, नर्मदा प्रसाद प्रजापति से भी कद्दावर और सरकार में अपने सशक्त  दखल रखने वाले बड़े नेता मौजूद थे, बावजूद इसके प्रजापतिजी ने जनता के दर्द को नजदीकी से समझा। किसानों, खेतिहर मजदूरों, गरीबों के जीवन में अंधकार को हरने लगे। 1993 के ऊर्जा मंत्री बतौर एनपी प्रजापति के कार्यकाल पर अगर एक सरसरी निगाह डाली जाए तो दलगत राजनीति से ऊपर उठकर गांव-गांव ट्रांसफार्मर, अस्पताल, सड़क, पानी, 220 केवी सर्विस स्टेशन शामिल हैं। ऊर्जा मंत्री रहते हुए एनपी प्रजापति ने विद्युतीकरण की योजनाओं को ग्रामों तक पहुंचाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। उस वक्त  विपक्ष जब उनका विरोध करता तो वह कहते कि विपक्ष अपना दायित्व निभा रहा है, यही उनका कर्तव्य भी है। विपक्ष जब आवाज उठाता है तो हमें दुगुनी रफ्तार से कार्य करने का हौसला मिलता है।
आज भी बुलंदी के साथ खड़ीं दर्जनों सौगातें
1993 के ऊर्जा मंत्री और वर्तमान कमलनाथ सरकार में विधानसभा अध्यक्ष नर्मदा प्रसाद प्रजापति को हम सब एक नेता के तौर पर कम लेकिन एक अच्छे इंसान के तौर पर अधिक जानते हैं।  याद दिला दें कि जब गोटेगांव विधानसभा से 1985 में एन पी प्रजापति चुनाव जीते तो इस क्षेत्र और जिले के लोगों की सबसे बड़ी समस्या थी झाँसी घाट का जर्जर पुल। जब यह बात यहाँ के संवेदनशील विधायक को ज्ञात हुई तो उन्होंने पुल निर्माण के प्रयास तेज किये और आज भी उनके द्वारा जनता को भेंट की गई पुल की सौगात हमारे सामने बुलंद खड़ी है। इसके बाद तो स्कूलों, स्वास्थ्य केंद्रों और विद्युत सब स्टेशनों का युद्धस्तर पर निर्माण होने लगा। उस समय का गोटेगांव और आज का श्रीधाम देखकर आपको यह अंदाजा लग जाएगा कि विकास किसे कहते हैं।
मात्र माह में 250 करोड़ के विकास कार्य
वर्तमान समय में जिले की प्राथमिक समस्याओं को देखते हुए जो खाका उनके द्वारा खींचा गया है वह अद्वितीय है। मात्र 9 माह में 250 करोड़ रुपए के विकास कार्यों की सौगात दी जा चुकी है। शहर को सुंदर बनाने की कार्ययोजना पर अमल जारी है, तो वहीं आने वाले समय में सीवेज सिस्टम, पुस्तकालय, ट्रांसपोर्ट नगर, हवाई पट्टी, खुली जेल सहित शिक्षा में कॉलेजों का उन्न्यन बड़े पैमाने पर किया जाना है।
जनता से सतत संपर्क
चुनावों में हार-जीत के बाद भी जनता से सतत संपर्क उन्हें नेता से ज्यादा पारिवारिक व्यक्ति  की तरह संबंध निभाने वाला सदस्य बनाता है। यही गुण उन्हें नेताओं से विरला और जनहितकारी बनाता है। आज वह मध्यप्रदेश में संवैधानिक पद पर विधानसभा अध्यक्ष हैं, यहां के लोगों को कठिनाइयों को पास से देखने के बाद विकास के जो सपने आम जनमानस ने देखे उन्हें पूरा करने के लिए वह जी जान से जुट गए। नतीजा आज हमारे सामने है, युवा खिलाड़ियों के लिए एस्ट्रोटर्फ की सौगात हो या फिर स्वास्थ्य संबंधी योजनाएं, आज यह जमीनी स्तर पर हमें क्षेत्र में नजर आने लगी हैं।
खुले दिल से करें स्वागत
अब इस जिले की जनता, नागरिकों, बुद्धिजीवियों, पत्रकारों, साहित्यकारों, अफसर और कर्मचारियों का दायित्व बनता है कि जनता और क्षेत्र के लिए जो सौगातें दी जा रही हैं, उनका खुले दिल से स्वागत करें। अपने बीच के कार्य करने वाले सेवक को यह ज्ञात कराते चलें कि और क्या बेहतर हो सकता है या किया जा सकता है। आज चहुँओर विकास की गंगा बह चली है, विधानसभा अध्यक्ष के भागीरथी प्रयासों से भविष्य में यह जिला प्रदेश के पटल पर मॉडल के रूप में देखा जाएगा, ऐसी पूरी उम्मीद है। इन सबके अलावा क्षेत्र के लिए ऐसी अनेक जनहितैषी योजनाएं हैं जो भविष्य के गर्भ में हैं, जिन्हें साकार रूप लेने में वक्त  लगेगा पर आप सबका साथ होगा तो यह मुमकिन है कि इसे आने वाले समय में आप धरातल पर पूर्ण होता देखेंगे। युवाओं के रोजगार, शिक्षा और किसानों की समस्याओं पर भी जल्द ही पूरे मनोयोग से चिंतन जारी है। मात्र 9 माह के विधानसभा अध्यक्ष के कार्यकाल में जिस उत्कृष्ट सोच से विकास कार्यों की शुरुआत हुई है, आने वाले पांच साल में यह कहां परवान चढ़ेगी, इसका सहज अंदाजा लगाना फिलहाल मुमकिन नहीं है। यही वजह है कि अक्सर विधानसभा अध्यक्ष एक बात बारम्बार दोहराते हैं कि-
रोशनी मेरी बहुत दूर तलक जाएगी
शर्त यह है कि सलीके से जलाओ मुझको…
हम सबका अब यह फर्ज है कि इस नरसिंहपुर जिले के विकास के उड़ते पंछी के पंखों को परवाज दें, एकजुटता के साथ यह आवाज दें कि दलगत राजनीति से उठकर सर्व धर्म समभाव के वाक्य को पूरा करें और विकास में सहभागी बने।

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