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राजराजेश्वरी का रूप चिंता से परे अचिंत है-श्री स्वामीजी

हीरापुर वाले स्वामीजी का जयंती महोत्सव प्रारंभ

करेली। मां श्री नर्मदा एवं मां पराम्बा, श्री श्री मां राजराजेश्वरी के अनन्य साधक, तपोनिष्ठ संत, अनंत श्री विभूषित, हीरापुर वाले श्री स्वामी जी महाराज के 64वें जयंती महोत्सव के अंतर्गत नर्मदा दक्षिण तट रेत घाट बरमान खुर्द स्थित पं.दुर्गा प्रसाद चौबे स्मृति धर्मशाला एवं सत्संग भवन में रविवार 1 सितंबर से 9 सितंबर 2019 सोमवार तक  आयोजित नौ दिवसीय  जयंती महोत्सव का धर्म आराधना पूर्वक श्री शिव महापुराण कथा से शुभारंभ किया गया।  मां श्री राजराजेश्वरी की महिमा का वर्णन करते हुए श्री स्वामी जी  नी कहा कि त्रिपुर सुंदरी मां राजराजेश्वरी का निवास सुधा सागर के मध्य में है। देवताओं ने एक मणिक दीप बनाया, जिसके चारों ओर जल है। उस मणिक दीप के अंदर देवी जी की नगरी श्री पुरम है। नगरी के बाहर नौ रत्नों की परिक्रमा बनी है, अंदर विविध कमलों के बगीचे हैं। नगर के बीच बीच देवी जी के राजमहल का नाम चिंतामणि ग्रह है। जहां जाने से कोई चिंता शेष नहीं रहती है, देवी जी का रूप चिंता से परे अचिंत है। देवी जी के सिंहासन की चार पाये चार देवता ब्रहमा विष्णु महेश और रुद्र हैं। आसन पर साक्षात सदाशिव लेटे हैं और कामेश्वर बैठे हैं। जिनकी गोद में देवी जी विराजमान हैं।जगदंबा की एक क्षण भी शिवजी से अलग नहीं है।

*यति और सती भारत की दो शक्तियां..*
बताया कि शिव उपासना अति प्राचीन है। आदिमानव भी शिव लिंग को पूजते थे। बाद में वे पेड़ पौधों और नदियों को भी पूजने लगे जो आज भी है। विश्व की सभी नदियां पवित्र हैं परंतु भारत की श्रेष्ठ हैं क्योंकि भगवान के अवतार सिर्फ भारत में हुए। यति और सती भारत की दो शक्तियां हैं, जो ईश्वरीय प्रदत्त हैं। भारत में अनेक नर्मदा घाटों में प्राचीन सती मढ़िये हैं व अनेक स्थानों पर प्राचीन संत समाधि भी हैं। भारत ऐसा देश है जहां मातृशक्ति की पूजा प्रत्येक क्षण होती है। पहले कन्या रूप में, फिर सौभाग्यवती, सुहासिनी के रूप में और बाद में माता राम के रूप में पूजा जाता है।

राम जन्मभूमि का निर्णय रामजी के पक्ष में
धर्म आयोजन में आने वाले देश के विभिन्न संत विद्वानों के क्रम में पावन श्रीराम कथा वाचक, अनंत श्री विभूषित चित्रकूट कामदगिरि पीठाधीश्वर जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी श्री रामस्वरूपाचार्य जी महाराज कामदनाथ प्रमुखद्वार, चित्रकूट धाम ने प्रथम दिवस के सत्संग में कहा कि भगवान शिव राम चरित्र के प्रेमी हैं और राम जब ही प्रसन्न होंगे जब शिव आराधना होगी। दुनिया को राम शिवजी के कारण ही मिले। परमात्मा के प्राकट्य के रहस्य को शिवजी ने  बताया रामचरितमानस आचार संहिता है। इससे सेवा का भाव सीखिए। समस्त शास्त्रों ने मानस को स्वीकार किया है। देववाणी से महत्वपूर्ण महादेव की वाणी है और मानस महादेव की वाणी है। कहा बैकुंठ जाने की जरूरत नहीं है, परमात्मा खुद आपकी श्रेणी में उतरकर आ जाते हैं। संत भगवान के विशेष दूत हैं। तुलसीदास जी ने लिखा है संत भगवंत में कोई अंतर नहीं है। संत के लक्षण हैं कि संत के हृदय में सरलता होनी चाहिए, भले ही जगत कल्याण के लिए वाणी में कठोरता हो। संत निंदा और प्रशंसा करने वाले दोनों का कल्याण करें। वाणी का प्रेम प्रदर्शन होता है और हृदय का प्रेम दर्शन होता है। आज संतों के प्रति जो अश्रद्धा हो रही है वह प्रदर्शनकारी संत हैं। कामदगिरि पीठाधीश्वर बोले धारा 370 देश का कलंक था। सत्ताएं बदलती रहती हैं। राष्ट्रीय मामले में सभी को एक रहना चाहिए। हमने भाव से कश्मीर को एक किया है। राम जन्मभूमि का मैटर भी जल्द हल होने वाला है और वह निर्णय किसी और के पक्ष में नहीं रामजी के पक्ष में ही होने वाला है।

अपरान्ह 2 से 5:30 तक प्रवचन
श्री शिव महापुराण कथा प्रवक्ता धर्माधिकारी पं.श्री राजेंद्र जी शास्त्री मानस भूषण उदयपुरा ने कहा कि जिस दिन शिवलिंग का प्रादुर्भाव हुआ, उसी दिन को शिवरात्रि कहते हैं। महाशिवरात्रि में पंचाक्षर मंत्र से शिवलिंग के अर्चन का अनंत फल है। गौमाता सर्वदेवमयी हैं। कहा जिसके घर में गौ और गुरु की सेवा होती है, वहां कलयुग का प्रभाव नहीं रहता। बिना शुद्धि के सिद्धि मिलने वाली नहीं है। मंजुल, मंगल, मोर तीन गुण विभूति में समाहित हैं। आयोजन में आगामी 7 सितंबर से 9 सितंबर तक अनंत श्री विभूषित जगतगुरु नृसिंह पीठाधीश्वर डॉ.स्वामी श्याम देवाचार्य जी महाराज नृसिंह मंदिर गीता धाम जबलपुर वालों के प्रवचन होंगे। साथ ही श्री गुरुधाम श्री कैलाश आश्रम बेंगलुरु से अनंत श्री विभूषित स्वामी श्री षणमुख अडिकलार जी महाराज श्री साधु स्वामीगल मठ पलनि तमिलनाडु एवं अनंत श्री विभूषित स्वामी श्री अखिलानंद जी महाराज श्री स्वामी विवेकानंद आश्रम तिरुकुटरालम तमिलनाडु का आगमन होगा। प्रतिदिन प्रातः पूज्य स्वामी जी के द्वारा दिव्य श्री अर्चन किया जावेगा। अपरान्ह 2 बजे से शाम 5:30 बजे तक प्रवचन होंगे। 9 सितंबर सोमवार को श्री स्वामी जी महाराज के 64वां जयंती महोत्सव धूमधाम से मनाया जावेगा।

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