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भगवान राम के जेष्ठ पुत्र कुश के वंशज है: कछवाहा वंश

राजसमन्द सांसद दियाकुमारी के पिता ब्रिगेडियर स्व. सवाई भवानीसिंह थे 309 वें वंशज
(✍ नरसिंहपुर केसरी)
इतिहास का आवरण एक बार फिर बेपर्दा होने को मचल रहा है। वो मचल रहा है दुनियां को सच्चाई से रूबरू कराने के लिए। वो मचल रहा है उन तमाम रहस्यों को उजागर करने के लिए जिसे हिन्दू समाज सदियों पूर्व अंधेरी काल कोठरी में दफ्न कर आया था। लेकिन कहते हैं ईश्वर की मर्जी के बगैर एक पत्ता भी इधर से उधर नहीं होता…. वर्षों से लंबित अयोध्या के रामलला मंदिर पर इस बार कोर्ट में लगातार सुनवाई शरू हो चुकी है। सुप्रीम कोर्ट ने प्रश्न किया- क्या भगवान राम का कोई वंशज अयोध्या या दुनिया में है ? रामलला के वकील ने अनभिज्ञता जाहिर की तो इस बात का जवाब किसके पास हो सकता है ?
प्रश्न के पैर इतने छोटे भी नहीं थे कि अदालत में ही पसर जाते। बात पहुंची राजसमन्द की सांसद दियाकुमारी और उनके परिवार के कानों तक। बस फिर क्या था… इतिहास का बेपर्दा होना लाजमी ही था।
अयोध्या के राजा राम के ज्येष्ठ पुत्र कुश थे और उनके नाम से ही कछवाहा वंशज जाना जाता है। वर्तमान में जयपुर के पूर्व महाराज स्व. ब्रिगेडियर सवाई भवानीसिंह और सांसद दियाकुमारी इसी कछवाहा परिवार की वंशज है। ब्रिगेडियर सवाई भवानीसिंह 309 वें व वर्तमान महाराज सवाई पद्मनाभसिंह 310 वें वंशज माने जाते हैं और जिसके स्पष्ट प्रमाण मौजूद है। इतिहास में देखा जाय तो ढूंढाड़ क्षेत्र का भगवान राम से गहरा नाता रहा है। जयपुर में रामलला सहित भगवान राम के 268 मंदिर है। राम की जन्म भूमि का अति प्राचीन मानचित्र आज भी सिटी पैलेस के कपड़द्वारा में सुरक्षित रखा है, जिसे 1992 में आम जनता को दिखाया गया था। रियासतकाल में पहले आमेर और बाद में नई राजधानी में अयोध्या की परंपराओं का पालन किया जाता रहा है। एक तरफ जहां आमेर के किले में अयोध्या की तर्ज पर बनी सीता रसोई में रामायण के प्रसंग चित्र बने हुए हैं वहीं दूसरी तरफ जौहरी बाज़ार का रामलला रास्ता और बालानन्द मठ में राघव जी का दुर्लभ मंदिर साक्ष्यों कि स्पष्ट गवाही देता है।
यक्ष प्रश्न यह है कि ऐतिहासिक रूप से लिखित और मौखिक तथ्य मौजूद होने के बावजूद राजसमन्द सांसद दियाकुमारी और उनका परिवार क्या सुप्रीम अदालत में इस बात की गवाही देगा या तथ्यों की पुष्टि करने के लिए
दरवाजा खटखटाएगा ?
मेरा व्यक्तिगत रूप से मानना है कि सिर्फ सांसद दियाकुमारी और जयपुर के महाराज सवाई पद्मनाभसिंह ही नहीं, जहां पर भी कछवाहा वंश के अंश मौजूद है और उनके पास अगर ओर भी प्रमाण है तो उन सबको निश्चित रूप से कानून के बड़े द्वार पर दस्तक देनी चाहिए। ताकि रामलला के भव्य मंदिर में आ रही अड़चनों को दूर किया जा सके।

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