Sunday Special

शाम घिर,आई – आई, याद – फिर,वतन की

शाम घिर,आई – आई,
याद – फिर,वतन की,
खुशबु भीनी,घर की चीनी,
मीठी -छाँव,सुर्ख अमन की,
शाम घिर,आई – आई,
याद – फिर,वतन की.

वो पेड,वो परिन्दे – सब,
अपने – से – बाशिन्दे,
बिछी आँगन,की चटाई,
महके – फूल,से कारिन्दे,
धूल – वो,चौखट – की,
जो – पावों,पर थी – सदके,
वो पत्ते,ताश के जिनमें,
कम – रहे,सेर – इक्के,
छत पर,भरा – अटाला,
महक किसी,हवन की,
शाम घिर,आई – आई,
याद – फिर,वतन की.

आलू के गर्म,परांठे जिनका,
स्वाद् – जैसे – जादू,
पना – आम – का – हो,
मन क्यों ना,फिर बेकाबू,
मकड़ी के उन,जालों जिनमें,
धूप – थी – चिपकती,
एक – रेत – एक शरारत,
थी – दीवालों,से – दरकती,
वो आना नींद,छत पर,
एक कहानी,थोड़ी सनकी,
शाम घिर,आई – आई,
याद – फिर,वतन की.

अवनि

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