छुपा रुस्तम

इन पर कब होगी प्रशासन की नजर…

कहीं RO वाटर के नाम पर ‘मीठा जहर’ तो नही पी रहे है आप

आज घरों में शुद्ध और स्वच्छ पानी के लिए RO सिस्टम का प्रयोग बहुतायत में होता है क्योंकि ऐसा लोगों को लगता है कि आरओ का पानी पूरी तरह से शुद्द होता है लेकिन हम आपको बताते चलें की RO सिस्टम का पानी जितना शुद्ध होता है उतना ही खतरनाक भी है जो सेहत को नुकसान भी पहुंचा सकता है।

मध्य प्रदेश की हर जिलों में संचालित RO प्लांटो की होनी चाहिये जांच :-जिले में लोकल ब्रांड समेत दूसरे जिले के भी पानी पाउच व बोतलें कम से कम दाम पर ये जगह-जगह बिक रही है। कई कंपनी के पानी पाऊच में तो उत्पादन और एक्सपायरी डेट तक नहीं लिखी हुई है। जिससे यह तक मालूम नहीं चलता कि पैकेट में पानी कितने समय का है। इसके अलावा जिले में आरओ वाटर के नाम पर लाखों का व्यापार हो रहा है।
दुकान से लेकर आफिस, घरों व शादियों में आरओ वाटर केन ट्रेंड बन गया है, लेकिन यह पानी कितना शुद्ध है, इसकी जानकारी संबंधित विभाग के अधिकारियों के पास भी नहीं है। क्योंकि इस साल अब तक पानी सैंपल की जांच नहीं हो पाई है। ऐसे में पानी कितना शुद्ध है, पानी में जरूर मिनरल्स है कि नहीं, इसकी शुद्धता को लेकर किसी के पास कोई जानकारी नहीं है। रोजाना हजारों बैग बिकने वाले पानी पाउच की शुद्धता से भी लोग अनजान है, बावजूद जमकर इस्तेमाल हो रहा है। खरीददार से लेकर जिम्मेदार विभाग ने इस पर कोई सवाल नहीं उठाया है, लोगों को यह तक पता नहीं है कि उन्हें आरओ वाटर के नाम पर कौन सा पानी पिलाया जा रहा है, और ये स्वास्थ्य के लिए कितना खतरनाक हो सकता है।स्थानीय नागरिकों ने कलेक्टर से इन RO प्लांट की जांच करने की मांग एवं प्लांट में कमी मिलने पर तुरंत सील करने की कार्यवाही की मांग की है।

आर ओ का पानी बन जाता है ‘मीठा जहर’ :-इसमें कहीं कोई दो राय नहीं है कि आर ओ पानी को सही तरह से शुद्ध करने का काम करता है। लेकिन यह तभी तक पानी को पूर्ण रुप से शुद्ध कर सकता है जब तक इसके पार्टस सही रहते हैं। पर जैसे ही आर ओ का फिल्टर पार्टस पुराना होता है इसकी कार्य क्षमता भी कम होती जाती है। कार्य क्षमता कम होने के कारण पानी में ना सिर्फ टीडीएस बढ़ जाता है बल्कि बैक्टीरिया का भी खतरा रहता है।

Tags

Related Articles

Back to top button
Close