Sunday Special

क्या तू भी

कभी किसी से कुछ कहती
नही हूँ मैं ,
अक्सर सब अकेले सहती रहती हूं मैं
क्या जगा है तू भी उन रातो में
जिनमे आखे मूंद कर रोया करती हूं मैं
खुली आँखों से सपने सजती हूँ मैं
उन सपनों को पाने के लिए ना जाने
क्या क्या छोड़ देती हूँ मैं
क्या ? तू भी जीता उन सपनों को
जिनको पूरा करने की चाहत में रात भर
जगा करती हूं मैं
हमेशा तुझसे शिकायत करती हूं मैं
पर पता है तुझे तुम्हारे बिना एक कदम भी
नही चल सकूँगी मैं
क्या तू भी आता है उन गलियों में जहाँ
राधा या मीरा बन कर घुमा करती हूँ मैं
                                                 -अमीषा

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