Sunday Special

छाँव – तुम्हारी,आँखों में !

छाँव – तुम्हारी,आँखों में,
घिरती है – अच्छी लगती है,
बादल है,खुशबु – तितली है,
फिरती है – अच्छी लगती है,
छाँव – तुम्हारी,आँखों में,
घिरती है – अच्छी लगती है !

हैं रंग – हजारों,हाथो पर,
उतने ही,गहरी बातों पर,
कुछ पहचानी,तो है,तन्हाई,
और पंख,गुलाबी,सांसों पर,
एक भीड़,सुनहरी माथे पर,
खींचती है – अच्छी लगती है,
छाँव – तुम्हारी,आँखों में,
घिरती है – अच्छी लगती है !

एक रोज को,जुगनू और तारे,
लाने हैं गिनकर – सब – सारे,
दूर परवत से,चुनकर – मोती,
और – सागर से,झीने – फव्वारे,
एक – खुशी,तुम्हारे होंठों – पर,
सिचती है – अच्छी लगती है,
छाँव – तुम्हारी,आँखों में,
घिरती है – अच्छी लगती है

अवनि

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