Sunday Special

जिसने मेरे दिल के हर राज़ को जाना हैं

जिसने मेरे दिल के हर राज़ को जाना हैं,
वो मेरा कान्हा है…
जो हर द्रुपदी की लाज़ को सवारा हैं,
वो मेरा कान्हा है…
जिसकी चाहत में मीरा ने हर हद से गुजरने का ठाना हैं
वो मेरा कान्हा है…
जिसका हर एक व्यक्ति दीवाना हैं,
वो मेरा कान्हा है…
उसकी माया को न किसी ने जाना हैं,
वो मेरा कान्हा है…
मेरे बिना कहे जिसने मेरी हर चाहत को पहचाना हैं,
वो मेरा कान्हा है…
कमल जैसे अनमोल जिसके नयना हैं,
वो मेरा कान्हा है…
जो कण-कण के लिए जाना पहचाना है
वो मेरा कान्हा है…
जिसकी मुस्कान पर खिल-खिलाता सारा जमाना हैं,
वो मेरा कान्हा है…
जिसकी मुरली की मधुर के बिना सारा जहां बेगाना हैं
वो मेरा कान्हा है…
जो चंचल निर्मल मोर मुकुटधारा हैं
वो मेरा कान्हा है…
“राधे के ज़िक्र के बिना जो आधा गोपाला हैं”
वो मेरा कान्हा है…

अमीषा

Tags

Related Articles

Check Also

Close
Back to top button
Close