Sunday Special

बादल – घिर – आये ! रचियता : अवनि

सागर से,लिए मोती,
एक खुशबु,फिर लाए,
बादल – घिर – आये !

धूप को धकेल दिया,
सुनसान,किसी कोठरी में,
हवा भर,लाई नमी,
नर्म हरी,टोकरी में,
झूमें नीम,गुलमोहर,
धरती – नीर – पाए,
बादल – घिर – आये !

पर्वत ने,नदिया तक,
द्वार,अपना,खोल दिया,
कलकल की धारा ने,
तट को,अपना,बोल दिया,
अंकुर की,आँख खुली,
पंछी – गीत – गाये,
बादल – घिर – आये ! 

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