खेल

दो साल बाद भी नही बन सके खेल मैदान

दबोह क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों में खेल कूद की गतिविधियां लगभग बंद हो गई हैं। युवाओं को किसी खेल में भाग लेने के लिए शहर आकर तैयारी करनी पड़ती है। क्योंकि गांवों में खेल मैदान स्वीकृत कर दिए हैं, लेकिन प्रशासन उन्हें बनाना भूल गया है। गौरतलब है कि विजपुरा गांव का खेल मैदान वर्ष 2016-17 में स्वीकृत किया गया था। पंचायत के सहयोग से सीमांकन भी किया गया। लेकिन निर्माण की प्रक्रिया ठंडे बस्ते में डाल दी गई है। उसके बाद बरसात में ग्राउंड में पानी भर गया, जिसमें मवेशियों ने गहरे गड्ढे कर दिए हैं। गांव के युवाओं की खेल गतिविधियां पूरी तरह से प्रभावित हो गई हैं। गांव के सुमित शर्मा, अमित शर्मा, फूलसिंह कुशवाह, अरुण केवट सहित आदि युवाओं ने स्टेडियम बनाने की मांग की है।

गांवों में अधूरे हैं स्टेडियम: सरकार द्वारा पंचायतों में खेल स्टेडियम बनाने की घोषणा की गई थी। जिसके बाद अधिकांश गांवों में खेल के मैदान चिन्हित कर स्टेडियम बनाने के लिए प्रस्ताव पारित किया गया। निर्माण की राशि भी मंजूर की गई, मगर पंचायतों में खेल स्टेडियम का निर्माण नहीं कराया जा सका। स्टेडियम के अभाव में गांव के प्रतिभावान युवा खेलों में भविष्य निर्मित नहीं कर पाते हैं। शासन द्वारा आयोजित समर कैंप या अन्य शिविरों में पहुंचकर महज खानापूर्ति की जाती है। जबकि गांवों में स्वीकृत खेल मैदान को बनाने पर प्रशासन ने गंभीरता से विचार नहीं किया है। इस संबंध में जब अधिकारियों से बात की गई तो उन्होंने यह कहकर पल्ला झाड़ दिया कि मामले की जानकारी नहीं है। जांच कराएंगे।

विजपुर गांव का बदहाल खेल स्टेडियम।

स्टेडियम क्यों नहीं बने दिखवाते हैं।

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