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सरकारी खेल प्रोजेक्ट फैल

लगभग तीन साल पहले जेडीए ने जगतपुरा शूटिंग रेंज को स्पोर्ट्स काउंसिल के हवाले कर दिया था। स्पोर्ट्स काउंसिल को 12 करोड़ रुपए भी मिले थे। इन पैसों से शूटिंग रेंज को डेवलप करना था। खिलाड़ियों को सुविधाएं उपलब्ध करवानी थीं। पिछले बजट में शूटिंग रेंज में इलेक्ट्रॉनिक स्कोरिंग टारगेट (ईएसटी) लगाने के लिए 5 करोड़ रुपए खर्च करने की बात कही गई। अभी तक न तो ईएसटी इंस्टाल हुए हैं और न ही रेंज में खिलाड़ियों को किसी तरह की कोई सुविधा मिल रही है। तीन साल पहले जेडीए ने शूटिंग रेंज काउंसिल को सौंपी थी, 12 करोड़ रुपए भी दिए थे

सरकारी रेंज पर प्राइवेट कोचिंग

शूटिंग रेंज सरकारी है। स्पोर्ट्स काउंसिल का कोई कोच आमतौर पर नजर नहीं आता। 10 मीटर रेंज पर कुलदीप शर्मा ज्यादातर निशानेबाजों को प्राइवेट कोचिंग देते हैं। इन्हीं के एक शिष्य दिव्यांश पवार 2020 टोक्यो ओलिंपिक का कोटा हासिल कर चुके हैं।

50 लाख के उपकरण स्टोर में बंद

शूटिंग रेंज के एक सूत्र ने बताया कि डेढ़ साल पहले स्पोर्ट्स काउंसिल करीब 50 लाख के शूटिंग उपकरण (एयर गन, पैलेट्स, गैस सिलेंडर आदि) मंगवा चुका है लेकिन ये स्टोर में बंद पड़े हैं।

नए सिरे हो चुकी है बातचीत

खेलमंत्री चांदना खुद खेलप्रेमी हैं इसलिए उम्मीद है कि जल्द ही शूटिंग रेंज के अपग्रेडेशन का काम हो जाएगा। हम कुछ और ओलिंपियन निशानेबाज इस रेंज से निकाल सकेंगे। -शशांक कोरानी, सचिव, राज्य शूटिंग संघ
कंपनी को लेटर अॉफ क्रेडिट का इंतजार

ईएसटी लगाने के लिए स्विट्जरलैंड की कंपनी से डील हुई। किसी न किसी कारण से मामला लटकता गया। इस बीच स्विस फ्रैंक और भारतीय रुपए में काफी फर्क आ गया तो कंपनी ने ईएसटी पुराने रेट पर उपलब्ध कराने में आनाकानी की। इस बीच राजस्थान में सरकार बदल गई। नए सिरे से प्रक्रिया शुरू हु॰ई। कंपनी के प्रतिनिधियों से बात की गई तो पुराने रेट पर ईएसटी उपलब्ध कराने को राजी हो गई। उसने स्पोर्ट्स काउंसिल से बैंक गारंटी (लेटर अॉफ क्रेडिट) की मांग की। अभी तक कंपनी को लेटर अॉफ क्रेडिट नहीं मिला है। कंपनी के एक प्रतिनिधि ने कहा, जैसे ही हमें लेटर अॉफ क्रेडिट मिल जाएगा, एक महीने में ईएसटी इंस्टाल कर देंगे।

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